मीरा ट्रेन में सफर कर रही थी, खिड़की से बाहर झांक रही थी। तभी सामने बैठा एक लड़का, आरव, उसकी किताब देख कर बोला – “ये मेरी भी पसंदीदा किताब है।”
दोनों ने बातें शुरू कीं और सफर खत्म होते-होते ऐसा लगा जैसे बरसों से जान-पहचान हो। स्टेशन पर उतरते वक्त आरव ने कहा – “मीरा, क्या ये सफर हम जिंदगी भर साथ तय करें?”
मीरा मुस्कुरा कर बोली – “हाँ।”

