दिशा एक छोटी-सी प्यारी लड़की थी। वह पढ़ाई में बहुत अच्छी थी और हमेशा अपने गाँव के लोगों की मदद करती थी। हर कोई उसे बहुत पसंद करता था क्योंकि वह हर किसी से प्यार से बात करती और हमेशा मुस्कुराती रहती थी।
लेकिन दिशा को एक आदत थी – वह किसी काम को बीच में छोड़ देती थी। चाहे पढ़ाई हो, चित्र बनाना हो या घर का काम, वह शुरू तो करती थी लेकिन पूरा नहीं कर पाती थी।
एक दिन उसके स्कूल में चित्रकला प्रतियोगिता हुई। दिशा ने भी हिस्सा लिया। उसने बहुत सुंदर चित्र बनाना शुरू किया लेकिन बीच में उसे खेलने की इच्छा हुई और उसने पेंटिंग अधूरी छोड़ दी।
जब परिणाम आए, तो उसके सभी दोस्तों को इनाम मिला, लेकिन दिशा का नाम सूची में नहीं था। वह बहुत उदास हुई। तभी उसकी अध्यापिका ने उसे समझाया –
“बेटा, अगर तुम काम को अधूरा छोड़ दोगी तो कभी सफलता नहीं मिलेगी। मेहनत और धैर्य से किया गया काम ही फल देता है।”
उस दिन के बाद से दिशा ने ठान लिया कि चाहे कोई भी काम हो, उसे अंत तक पूरा करना है। धीरे-धीरे उसने अपनी आदत बदली। अगले साल की प्रतियोगिता में उसने एक सुंदर चित्र पूरा किया और पहला पुरस्कार जीत लिया।
गाँव के लोग और उसके माता-पिता बहुत खुश हुए। दिशा ने सीखा कि –

