राजू पढ़ाई में असफल होकर निराश बैठा था। तभी उसने देखा कि एक मकड़ी जाला बना रही थी। बार-बार उसका जाला टूटता लेकिन मकड़ी हार नहीं मानती। आखिर उसने सुंदर जाला बना लिया। राजू ने सोचा – “जब मकड़ी हार नहीं मानती तो मैं भी मेहनत करूँगा।” फिर वह सफल हो गया।


राजू पढ़ाई में असफल होकर निराश बैठा था। तभी उसने देखा कि एक मकड़ी जाला बना रही थी। बार-बार उसका जाला टूटता लेकिन मकड़ी हार नहीं मानती। आखिर उसने सुंदर जाला बना लिया। राजू ने सोचा – “जब मकड़ी हार नहीं मानती तो मैं भी मेहनत करूँगा।” फिर वह सफल हो गया।

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