कृष्ण ने पहली बार बाँसुरी बजाई, उसकी मधुर धुन पूरे वृंदावन में गूँज उठी। राधा उस स्वर को सुनते ही मोहित हो गईं और अपने मन से बोलीं – “ये तो मेरे कानों के लिए नहीं, मेरे हृदय के लिए है।”
उस दिन से बाँसुरी, राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक बन गई।



कृष्ण ने पहली बार बाँसुरी बजाई, उसकी मधुर धुन पूरे वृंदावन में गूँज उठी। राधा उस स्वर को सुनते ही मोहित हो गईं और अपने मन से बोलीं – “ये तो मेरे कानों के लिए नहीं, मेरे हृदय के लिए है।”
उस दिन से बाँसुरी, राधा-कृष्ण के प्रेम का प्रतीक बन गई।


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