कौआ तोते की बोली से जलता था। उसने हरे पंख रंग लिए और तोतों के पास जा पहुँचा। लेकिन उसकी “काँव काँव” सुनते ही तोतों ने उसे भगा दिया। अपने झुंड में भी वह जगह न पा सका और अकेला रह गया।


कौआ तोते की बोली से जलता था। उसने हरे पंख रंग लिए और तोतों के पास जा पहुँचा। लेकिन उसकी “काँव काँव” सुनते ही तोतों ने उसे भगा दिया। अपने झुंड में भी वह जगह न पा सका और अकेला रह गया।

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